دیوانِ غزلیات · بیدل دهلوی · غزل 255
ز بادهایست به بزم شهود، مستی ما
ز بادهایست به بزم شهود، مستی ما
که کرد رفع خمار شراب هستی ما
з бода-эй-ст ба базм шаҳуд, масти мо
ки кард рафаъ хамор шароб ҳастӣ мо
بگو به شیخ که: از کفر تا به دین فرق است
ز خودپرستی تو تا به میپرستی ما
багу ба ших ки: аз кафар то ба дин фарақ аст
з ходапарасти ту то ба мӣ-парсати мо
زدیم دست به دامان عشق از همه پیش
مراد ما شده حاصل ز پیشدستی ما
здим даст ба домон ишқ аз ҳама пиш
марод мо шада ҳосал з пиш-дасти мо
به راه دوست چنان مست بادهٔ شوقیم
که بیخودند رفیقان ما ز مستی ما
ба ро дуст чанон маст бода шуқим
ки биходанд рфиқон мо з масти мо
به پیش سرو قدی خاک راه شد بیدل
بلند همتی ما ببین و پستی ما
ба пиш сару қади хок ро шуд бидел
баланд ҳамати мо бабин ва пасти мо
واژهنامهٔ این غزل · 16 واژه
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- عشق
- مهرِ سوزان؛ نیرویِ بنیادینِ هستی و راهِ فنا.
- راه
- مسیرِ رفتن؛ نمادِ طریقتِ سلوک و سفرِ معنوی.
- بزم
- مجلسِ شادی و باده؛ نمادِ محفلِ انس و حضور.
- بلند
- رفیع و والا؛ نمادِ همتِ بزرگ و سرفرازی.
- دامان
- دامنِ جامه؛ نمادِ پناه، توسل و حریمِ محبوب.
- حاصل
- دستاورد و نتیجه؛ نمادِ ثمرِ عمر و بهرهٔ نهایی.
- سرو
- درختِ بلندِ راست؛ نمادِ قامتِ موزونِ معشوق و آزادگی.
- باده
- شراب؛ نمادِ مستیِ عشق و فیضِ معنوی.
- مستی
- سرخوشیِ می؛ بیخودیِ عاشقانه و محوِ هشیاری در حق.
- شراب
- بادهٔ مستیبخش؛ نمادِ عشق و شهودِ مستانهٔ عرفانی.
- خمار
- کسالتِ پس از مستی؛ نمادِ نیازِ دوبارهٔ جان به باده.
- دوست
- واژه یا ترکیبی در میدان «عشق / محبت»؛ کاربرد آن به همان شبکهٔ تصویری و مفهومی وابسته است.
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