چو شبنم تا نقاب اعتبار خویش شق کردم
چو شبنم تا نقاب اعتبار خویش شق کردم
ز شرم زندگی گفتم کفن پوشم، عرقکردم
чу шабанам то нқоб аъатабор хеш шақ-кардам
з шарм зандаги гафтам кафан пушм, ъарақ-кардам
کف پا میشدم ای کاش از بی اعتباریها
جبینگردیدم و صد رنگ خجلت در طبقکردم
каф по мӣ-шадам эй кош аз бе-аъатабориҳо
ҷабин-гардидам ва сад ранг хаҷалат дар табақ-кардам
چو صبحم یک تأمل درس جمعیت نشد حاصل
به سطری کز نفس خواندم ز خود رفتن سبق کردم
чу сабҳам як томал дарс ҷамаъит нашад ҳосал
ба сатари каз нафас хонадам з худ рафтан сабақ кардам
به حیرت صنعت آیینه را بردم به کار آخر
پریشان بود اجزای تماشا یک ورق کردم
ба ҳайрат санаъат оина ро бардам ба кор охар
паришон буд аҷазой тамошо як варақ кардам
مپرسید از قناعت مشربیهای حیات من
به ساغر آبرویی داشتم سد رمق کردم
мапарсид аз қаноъат машарабиҳой ҳиот ман
ба соғар обаравайай дошатам сад рамақ кардам
به هر جا فکر مستی نیست مخموری نمیباشد
هوسهای غذا بود این که خود را مستحق کردم
ба ҳар ҷо факар масти нест махамури нами-бошад
ҳусаҳой ғазо буд ин ки худ ро мастаҳақ кардам
شبی آمد به یادم گرمی انداز آغوشی
چنان از خود برون رفتم که پندارم عرق کردم
шаби омад ба йодам гарми андоз оғуши
чанон аз худ барун рафтам ки пандорм ъарақ кардам
زبان اصطلاح رمز توحیدم که میفهمد
که من هرگاه گشتم غافل از خود یاد حق کردم
забон асаталоҳ рамаз туҳидам ки мӣ-фаҳамад
ки ман ҳараго гаштам ғофал аз худ йод ҳақ кардам
نفس از دقت فکرم هجوم شعله شد بیدل
نشستم آنقدر در خون که صبحی را شفق کردم
нафас аз дақат факарм ҳаҷум шаъала шуд бидел
нашастам онақадар дар хон ки сабҳи ро шафақ кардам
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- خون
- مایعِ سرخِ تن؛ نمادِ درد، شور و جگرسوزیِ عشق.
- حیرت
- سرگشتگی آگاهانه در برابر حقیقتی که فهم عادی از آن بازمیماند.
- عرق
- تراوشِ پوست؛ نمادِ شرم، خجلت و لطافتِ رخسار.
- غافل
- بیخبر و ناآگاه؛ خفته از یادِ حق و حقیقت.
- شرم
- حیا و آزرم؛ پروای درونی در برابرِ معشوق و حق.
- یاد
- بهخاطرآوردن؛ حضورِ معشوق در دل و ذکرِ پیوسته.
- زبان
- عضوِ گفتار؛ ابزارِ بیان و گاه حجابِ معنای نهفته.
- شعله
- زبانه آتش؛ نماد شور، گدازِ عشق و فنای ناپایدار.
- شبنم
- رطوبت لطیف بامدادی؛ نماد لطافت، ناپایداری و اشک.
- فکر
- اندیشه؛ تأمل و سیرِ ذهن، گاه دامِ راهِ دل.
- زندگی
- حیات و بودن؛ فرصتِ گذرا و میدانِ آزمونِ جان.
- ساغر
- جامِ شراب؛ نمادِ دریافتِ فیض و سرمستیِ معنوی.