اگر درد طلب این گردم از رفتار جوشاند
اگر درد طلب این گردم از رفتار جوشاند
صدای پای من خون از رگ کهسار جوشاند
агар дард талаб ин гардам аз рафтор ҷушонд
садой-пой ман хон аз раг каҳасор ҷушонд
چه اقبال است یا رب دود سودای محبت را
که شمع از رشتهای کز پا کشد دستار جوشاند
ча ақабол-аст йо раб дуд судой муҳаббат ро
ки шамъ аз рашта-эй каз по кашад дастор ҷушонд
رموز یأس میپوشم به ستر عجز میکوشم
که میترسم شکست بال من منقار جوشاند
рмуз йос мӣ-пушм ба сатар ъаҷаз мӣ-кушм
ки мӣ-тарсам шакаст бол ман манқор ҷушонд
چه تدبیر از بنای سایه پردازد غم هستی
مگر برخیزم ازخود تا هوا دیوار جوشاند
ча тадабир аз баной сойа пардозд ғам ҳастӣ
магар бархизм азаход то ҳаво дивор ҷушонд
مشوران از تکلف آنقدر طبع ملایم را
که آتش میشود آبی که کس بسیار جوشاند
машурон аз такалаф онақадар табаъ малойам ро
ки оташ мӣ-шуд оби ки кас басиор ҷушонд
به اظهار یقین هم غرّهٔ دعوی مشو چندان
کز انگشت شهادت صورت زنهار جوشاند
ба азаҳор йқин ҳам ғара даъавай машу чандон
каз ангашт-шаҳодат сурт занаҳор ҷушонд
به خاموشی امانخواه از چنین هنگامهٔ باطل
که حرف حق چو منصور از زبانها دار جوشاند
ба хомуши амон-хо аз чанин ҳангома ботал
ки ҳарф ҳақ чу манасур аз забонаҳо дор ҷушонд
دل هر دانه میباشد به چندین ریشه آبستن
گریبان گر درد یک سبحه صد زنار جوشاند
дил ҳар дона мӣ-бошад ба чандин риша обастан
гарибон-гар дард як сабҳа сад знор ҷушонд
من و آن بستر ضعفی که افسون ادب آنجا
صدا را خفته چون رگ از تن بیمار جوشاند
ман ва он бастар заъафи-ки афасун адаб онҷо
садо ро хафта чун раг аз тан бимор ҷушонд
قیامت میبرم بر چرخ و از فکر خودم غافل
حیا ای کاش چون صبحم گریبان وار جوشاند
қиёмат мӣ-барм бар чарх ва аз факар ходам ғофал
ҳио эй кош чун сабҳам гарибон-вор ҷушонд
جمال مدعا روشن نشد از صیقل دیگر
مگر خاکستر از آیینهام دیدار جوشاند
ҷамол мадаъо рушан нашад аз сиқал дигар
магар хокастар аз оинаам дидор ҷушонд
به کلفت ساختم از امتداد زندگی بیدل
چو آب استادگی از حد برد زنگار جوشاند
ба калафт сохатам аз аматадод зандаги бидел
чу об астодаги аз ҳад бард зангор ҷушонд
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- شکست
- درهمشکستگی؛ نمادِ نیستی و فروریختنِ خودیِ عاشق.
- خون
- مایعِ سرخِ تن؛ نمادِ درد، شور و جگرسوزیِ عشق.
- آتش
- شعله و سوز؛ کنایه از عشق، درد، شور یا نابودی.
- بال
- پرِ پرواز؛ نمادِ اوجگرفتن و رهاییِ روح.
- سایه
- اثر تاریک در برابر نور؛ کنایه از ناپایداری، پیروی یا وجود کمرنگ.
- پای
- عضوِ ایستادن و رفتن؛ نمادِ ثبات و گام در راه.
- عجز
- ناتوانی و درماندگی؛ فروتنیِ بنده در برابرِ حق.
- غافل
- بیخبر و ناآگاه؛ خفته از یادِ حق و حقیقت.
- درد
- رنج و الم؛ سرمایهٔ عاشق و راهِ پختگیِ جان.
- فکر
- اندیشه؛ تأمل و سیرِ ذهن، گاه دامِ راهِ دل.
- حیا
- شرم و آزرم؛ پردهٔ ادب و حجابِ جمالِ معشوق.