امشب ز ساز مینا گرم است جای مطرب
امشب ز ساز مینا گرم است جای مطرب
کوک است قلقل می با نغمههای مطرب
амашаб з соз мино гарм аст ҷой матараб
кук аст қалқал мӣ бо нағама-ҳой матараб
دریوزه چشم داریم از کاسههای طنبور
درحق ما بلند است دست دعای مطرب
дариваза чашм дорим аз коса-ҳой танабур
дараҳақ мо баланд аст даст даъой матараб
صد رنگ آه حسرت پیچیدهایم در دل
این ناز و آن نیاز است از ما به پای مطرب
сад ранг о ҳасарт пичида-айам дар дил
ин ноз ва он ниоз аст аз мо ба пой матараб
کیفیت بم و زیر مفهوم انجمن نیست
در پرده تا چه باشد منظور رای مطرب
кифит бам ва зир мафаҳум анаҷаман нест
дар парда то ча бошад маназур рой матараб
زان چهرهٔ عرقناک حیران حرف و صوتیم
هرجاست تر صدایی دارد حیای مطرب
зон чаҳара ъарақанок ҳирон ҳарф ва сутим
ҳараҷост-тар садойай дорад ҳиой матараб
شور لب تو ما را نگذاشت در دل خاک
آتش به نیستان زد آخر هوای مطرب
шур лаб ту мо ро нагазошт дар дил хок
оташ ба нистон зд охар ҳавой матараб
با محرمان عیشند بیگانگان ساقی
وز درد بینصیبند ناآشنای مطرب
бо маҳармон ъишанд бигонгон соқи
ваз дард бе-насибанд ношаной матараб
هرچند واسرایند صد ره ترانهٔ جاه
از نی بلند گردید شور نوای مطرب
ҳарачанд восаройанд сад ра тарона ҷо
аз ни баланд гардид шур навой матараб
تا ما خموش بودیم شوق تو بینفس بود
این اغنیا ندارند فیض غنای مطرب
то мо хамуш будим шуқ ту бе-нафас буд
ин ағанио ндоранд физ ғаной матараб
عذر دماغ مستان مسموع هیچکس نیست
یارب که گیسوی چنگ افتد به پای مطرب
ъазар дамоғ мастон масамуъ ҳичакас нест
йораб ки гисавай чанг афатад ба пой матараб
قانون به زخمه نازان، دف از تپانجه خندان
بر ساز ما فتادهست یکسر بلای مطرب
қонун ба захама нозон, даф аз тапонҷа хандон
бар соз мо фтода-ст йакасар балой матараб
بیدل که رحم میکرد بر سختجانی ما؟
ناخن اگر نمیبود زورآزمای مطرب
бидел-ки раҳам мӣ-кард бар сахт-ҷони мо?
нохан агар нами-буд зурозмой матараб
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- ساز
- آلتِ نوازندگی؛ نمادِ همآهنگی و نوای درون.
- آتش
- شعله و سوز؛ کنایه از عشق، درد، شور یا نابودی.
- ناز
- کرشمه و دلربایی؛ جلوهگریِ معشوق در برابرِ نیاز.
- لب
- کنارهٔ دهان؛ نمادِ سخن، بوسه و حیاتِ معشوق.
- پای
- عضوِ ایستادن و رفتن؛ نمادِ ثبات و گام در راه.
- درد
- رنج و الم؛ سرمایهٔ عاشق و راهِ پختگیِ جان.
- شوق
- اشتیاقِ سوزان؛ کششِ پرشورِ دل بهسوی معشوق و وصال.
- حسرت
- افسوس و دریغ؛ اندوهِ ناکامی و آرزوی برنیامده.
- آه
- نالهٔ دل؛ دودِ سینهٔ عاشق و فریادِ سوز و درد.
- پرده
- حجاب و پوشش؛ مانع آشکارشدن یا نشانه پنهانی راز.