برکاغذ آتش زده هر چند سواریم
برکاغذ آتش زده هر چند سواریم
فرصت شمران قدم آبله داریم
баракоғаз оташ зда ҳар чанд саворим
фарсат шамарон қадам обала дорим
چون شمع تلاش همه زین بزم رهایی است
گل میدمد آن خار که از پا به در آریم
чун шамъ талош ҳама зин базм раҳойай аст
гул мӣ-дамад он хор ки аз по ба дар орим
دل مغتنم فرصت اقبال حضوریست
تا آینه با ماست تماشایی یاریم
дил мағатанам фарсат ақабол ҳазурист
то оина бо мост тамошойай йорим
گر دقت فطرت ورق خاک تکاند
ماییم که پیدا و نهان خط غباریم
гар дақат фтарт варақ хок таконд
мойайам ки пидо ва наҳон хт ғаборим
روزی دو نفس گرمی هنگامهٔ نازست
هر چند فروزیم همان شمع مزاریم
рузи ду нафас-гарми ҳангома нозаст
ҳар чанд фаруз-йам ҳамон шамъ мазорим
زهاد اگر غرهٔ نیرنگ بهشتند
ماهم پر طاووس به سر چون نگذاریم
заҳод агар ғара ниранг бҳаштанд
моҳам пур товавас ба сар чун нагазорим
کمفرصتی از ما نکند ننگ فضولی
پرواز در آتش فکن سعی شراریم
камафарасти аз мо наканд нанг фазули
паравоз дар оташ факан саъи шарорим
از وصل تعین به غلط کرده فراهم
اجزای من و ما که بهم ربط نداریم
аз васал таъин ба ғалат-карда фароҳам
аҷазой ман ва мо ки баҳам рабат ндорим
آن قطرهٔ خونی که بجوشیم بهمگر
بیگانهتر از توأمی دانهٔ باریم
он қатара хони-ки баҷушим баҳам-гар
бигона-тар аз тавоми дона борим
کس جوهر ادراک بد و نیک ندارد
از آینه پرسید که ما با که دچاریم
кас ҷуҳар адарок бд ва ник надорад
аз оина парсид ки мо бо ки дачорим
باید الم خامهٔ نقاش کشیدن
بر هر سر رحمت سر صد قافله باریم
бойд алм хома нқош кашидан
бар ҳар сар раҳамат сар сад қофала борим
بیدل چه توان کرد به محرومی قسمت
ما خشکلبان ساغر دریا به کناریم
бидел ча тавон кард ба маҳаруми қасамат
мо хашак-лабон соғар дарё ба канорим
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- آینه
- سطح بازتابنده؛ در شعر نماد خودشناسی، صفا و جلوه است.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- آتش
- شعله و سوز؛ کنایه از عشق، درد، شور یا نابودی.
- سعی
- کوشش و تلاش؛ جهدِ سالک در راهِ مقصود.
- پرواز
- اوجگرفتن در هوا؛ نمادِ رهاییِ روح و آرزو.
- خط
- موی نورُستهٔ گونه؛ نمادِ زیباییِ نوخیزِ معشوق.
- قدم
- پا یا گام؛ نشانهٔ آمدن، حضور و سلوکِ راهِ معنا.
- فرصت
- مجال کوتاه انجام کار؛ در شعر غالبا لحظه گذرای عمر.
- جوهر
- ذات و بنیاد شیء؛ چیزی که قائم به خود دانسته میشود.
- آبله
- تاولِ پا یا دانهٔ پوست؛ نشانهٔ رنجِ راه و سلوک.