چه فسردگی بلد تو شد که به محفل من و ما بیا
چه فسردگی بلد تو شد که به محفل من و ما بیا
که گشود راه غنودنت که درین فسانهسرا بیا
ча фасардаги-балд ту шуд ки ба маҳафал ман ва мо био
ки-гашуд ро ғануданат-ки дарин фасона-саро био
نفسیست مغتنم هوس طربی و حاصل عبرتی
سر بام فرصت پر فشان چو سحر به کسب هوا بیا
нафаси-ст мағатанам ҳус-тараби ва ҳосал ъабарти
сар бом фарсат пур фашон чу саҳар ба-касаб ҳаво био
تکوتاز و هم جنون عنان به سپهر میبردت کشان
تو غبارباختهطاقتی به زمین عجز رسا بیا
так-ватоз ва ҳам-ҷанун ъанон ба-сапаҳар мӣ-бардат-кашон
ту ғаборабохта-тоқати ба замин ъаҷаз рсо био
به غبار قافلهٔ سلف نرسیدهای و گذشتهای
صف پیش میزندت صلا که بیا و رو به قفا بیا
ба ғубор қофала салаф нарсида-эй ва газашта-эй
саф пиш мӣ-зандат сало ки био ва ру ба қафо био
سر و پا دمی که به هم رسد، تکوتازها به قدم رسد
خم انتظار تو میکشم به وداع قد دوتا بیا
сар ва по дами-ки ба ҳам расад, так-ватозаҳо ба-қадам расад
хам анатазор ту мӣ-кашм ба вадоъ қад дуто био
به بتان چه تحفه برد اثر ز ترانه قسمی دگر
به رهت سیه شده خون من به بهار رنگ حنا بیا
ба батон ча таҳафа бард асар з тарона қасами дагар
ба раҳат сиа шада хон ман ба бҳор ранг ҳано био
کس ازین حدیقه نمیبرد کموبیش قسمت بیسبب
چو چنار کو طلب ثمر به هزار دست دعا بیا
кас азин ҳадиқа нами-бард кам-вабиш-қасамат бе-сабаб
чу чанор ку талаб самар ба ҳазор даст даъо био
به ادای ناز فضولیات سر و برگ حسن قبول کو
ستم است دعوت شه کنی که به کلبههای گدا بیا
ба адой ноз фазули-ат сар ва бараг ҳасан қабул-ку
сатам аст даъут ша кани ки ба-калаба-ҳой гадо био
به فسون حاجت هرزهدو، در جرأتی نگشودهام
ز حیا رسیده به گوش من که عرق کن آبلهپا بیا
ба фасун ҳоҷат ҳарза-ду, дар ҷароти нагашуда-ам
з ҳио рсида ба-гуш ман-ки ъарақ-кан обала-по био
تو چو شمع در بر انجمن به هوس ستمکش سوختن
کف پا نشسته به راه سرکه بلغز و جانب ما بیا
ту чу шамъ дар бар анаҷаман ба ҳус сатамакаш сухатан
каф по нашаста ба ро сарака балағаз ва ҷонаб мо био
من بیدل از در عاجزی به چه سو روم، به کجا رسم
همهسوست حکم برو برو همهجاست شور بیا بیا
ман бидел аз дар ъоҷази ба ча су рум, ба-каҷо расам
ҳама-суст ҳакам бару бару ҳама-ҷост шур био био
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- غبار
- گرد و خاک؛ نشانه محوی، فروتنی، ناپایداری یا حجاب دیدن.
- خون
- مایعِ سرخِ تن؛ نمادِ درد، شور و جگرسوزیِ عشق.
- هوس
- آرزوی زودگذر؛ میلِ نفسانی در برابرِ عشقِ راستین.
- جنون
- دیوانگی؛ شیداییِ عاشقانه و رهاییِ از عقل.
- ناز
- کرشمه و دلربایی؛ جلوهگریِ معشوق در برابرِ نیاز.
- بهار
- فصلِ شکوفایی؛ نمادِ جوانی، تازگی و جلوهٔ حسن.
- عرق
- تراوشِ پوست؛ نمادِ شرم، خجلت و لطافتِ رخسار.
- عجز
- ناتوانی و درماندگی؛ فروتنیِ بنده در برابرِ حق.
- راه
- مسیرِ رفتن؛ نمادِ طریقتِ سلوک و سفرِ معنوی.
- سحر
- سپیدهدم؛ زمان گشایش، دعا، بیداری و تغییر حال.
- قدم
- پا یا گام؛ نشانهٔ آمدن، حضور و سلوکِ راهِ معنا.