نیست با مژگانْ تعلق، اشکِ وحشتپیشه را
نیست با مژگانْ تعلق، اشکِ وحشتپیشه را
دانهٔ ما دامِ راه خویش داند ریشه را
нест бо мажагон таъалқ ашак вҳашт-пиша ро
дона мо дом ро хеш донд риша ро
عیشِ ترکِ خانمان از مردم آزاد پرس
کس نداند جز صدا قدرِ شکستِ شیشه را
ъиш тараки хонамон аз мардам озод парс
кас ндонд ҷуз садо қадар шакаст шиша ро
میشود اسرار دل روشن ز تحریک زبان
میدهد این برگ، بوی غنچهٔ اندیشه را
мӣ-шуд асарор дил рушан з таҳарик забон
мӣ-даҳад ин бараг, бавай ғанача андиша ро
کم ز هول مرگ نبوَد غلغل شور جهان
نعرهٔ شیر است مطرب مجلسِ این بیشه را
кам з ҳул мараг набуд ғалағал шур ҷаҳон
наъара шир аст матараб маҷаласи ин биша ро
همتِ فرهادِ ما را سرنگونی میکُشد
ناخنِ خاریدنِ سر گر شمارد تیشه را
ҳамат фараҳоди мо ро сарнагуни мӣ-кашад
нохани хоридани сар гар шморд тиша ро
گر شود دشمن ملایم، چشمِ لطف از وی مدار
مومیایی چاره ننماید شکست شیشه را
гар шуд дашман малойам, чашм латаф аз вай мадор
мумиойай чора нанамойд шакаст шиша ро
طبع را فیض خموشی میکند معنیشکار
نیست دامی جز تأمل وحشیِ اندیشه را
табаъ ро физ хамуши мекунад маъани-шакор
нест доми ҷуз томал ваҳашайи андиша ро
موج صهبا گر به مستان زندگی بخشد رواست
از رگ تاک است میراث کرم این ریشه را
мавҷ саҳабо гар ба-мастон зандаги бахашад равост
аз раг ток аст мирос-карм ин риша ро
عشق بردارد اگر مهر از زبان عاجزان
نالهٔ یک نی به آتش میدهد صد بیشه را
ишқ бардорд агар маҳар аз забон ъоҷазон
нола як ни ба оташ мӣ-даҳад сад биша ро
نور این آیینه را جوهر نمیگردد حجاب
نیست مژگان سدِ ره چشمِ تماشاپیشه را
нур ин оина ро ҷуҳар нами-гардад ҳаҷоб
нест мажагон сади ра чашм тамошопиша ро
گر نباشد بیتمیزیها مآلِ کارِ عشق
کوهکن بر صورت شیرین نراند تیشه را
гар набошад бе-тамизи-ҳо моли кор ишқ
куҳакан бар сурт ширин наронд тиша ро
مفلسان را بیدل از مشق خموشی چاره نیست
تنگدستی باز میدارد ز قُلقُل شیشه را
мафаласон ро бидел аз машақ хамуши чора нест
танг-дасти боз мӣ-дорад з қулқул шиша ро
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- موج
- برآمدگی آب؛ در شعر نشانه جنبش، اضطراب و ناپایداری.
- جهان
- گیتی و دنیا؛ سرای گذرا و فریبندهٔ هستی.
- ناله
- فریادِ دردمندانه؛ آوای سوز و شکوهٔ عاشق.
- شکست
- درهمشکستگی؛ نمادِ نیستی و فروریختنِ خودیِ عاشق.
- آتش
- شعله و سوز؛ کنایه از عشق، درد، شور یا نابودی.
- اشک
- قطرهٔ چشم؛ نشانهٔ گریه، شوق یا اندوهِ عاشقانه.
- عشق
- مهرِ سوزان؛ نیرویِ بنیادینِ هستی و راهِ فنا.
- مژگان
- موهای پلک؛ نمادِ تیرِ نگاه و گریهٔ عاشق.
- راه
- مسیرِ رفتن؛ نمادِ طریقتِ سلوک و سفرِ معنوی.
- زبان
- عضوِ گفتار؛ ابزارِ بیان و گاه حجابِ معنای نهفته.
- جوهر
- ذات و بنیاد شیء؛ چیزی که قائم به خود دانسته میشود.
- شیشه
- ظرفِ بلورین؛ نمادِ شکنندگیِ دل و صفای جان.