حسنکلاه هوسیگر به تجمل شکند
حسنکلاه هوسیگر به تجمل شکند
به که دل از ما ببرد بر سر کاکل شکند
ҳасан-кало ҳуси-гар ба таҷамал шаканд
ба-ки дил аз мо бабард бар сар кокал шаканд
بس که به گلزار وفا مشترک افتاده حیا
رنگ گل آید به صدا گر پر بلبل شکند
бас ки ба-галазор вафо маштарак афтода ҳио
ранг-гул ойд ба садо гар пур балабал шаканд
مجملت آمد به نظر پردهٔ تفصیل هدر
جزو پراکنده مباد آینه ی کل شکند
маҷамалат омад ба назар парда тафасил ҳадар
ҷазу пароканда мабод оина-й-кал шаканд
شمععا بساط طرب است آنکه درتن دشت قعب
سر به هوا پای به دامان توکل شکند
шамъ-ъо басот тараб аст онака дартан дашт қаъаб
сар ба ҳаво пой ба домон тукал шаканд
خواجه ز رنج کر و فر، ازچه برد بوی اثر
باز ندارد همهگر پشت خر از جلشکند
хоҷа з ранҷ-кар ва фар, азача бард бавай асар
боз надорад ҳама-гар пашт хар аз ҷал-шаканд
در ادب بدگهران موعظهٔ شرم مخوان
گردن این خیره سران گر شکند غل شکند
дар адаб бадагаҳарон муъаза шарм махон
гардан ин хира-сарон гар шаканд ғал шаканд
پایهٔ اقبال بلند آنهمه چون شمع مچین
کاخرکارت به عرق شرم تنزل شکند
пойа ақабол баланд онаҳама чун шамъ мачин
кохаракорт ба ъарақ шарм таназал шаканд
از طلب هرزهدرا چند دهی زحمت پا
کاش درین بحر سراب آبلهای پل شکند
аз талаб ҳарза-даро чанд даҳи заҳамат по
кош дарин баҳар сароб обала-эй пал шаканд
دل چه کند با من وما تا شود ایمن زبلا
کوه هم آخر ز صدا شیشه به قلقلشکند
дил ча-канд бо ман вамо то шуд айаман забало
куа ҳам охар з садо шиша ба қалқал-шаканд
سیری چشم است همان جرعهکش دور غنا
رنگ خمار تو مگر این دو قدح مل شکند
сири чашм аст ҳамон ҷараъа-каш дур ғано
ранг хамор ту магар ин ду қадаҳ мал шаканд
صبح زشبنم همه تن چشم شد ازشوق چمن
هرکه درین باغ رسید آینه بر گل شکند
субҳ зашабанам ҳама тан чашм шуд азашуқ чаман
ҳарака дарин боғ рсид оина бар гул шаканд
انجمنی راکه دهند آب زتوصیف خطت
دود چراغش همه شب طرهٔ سنبل شکند
анаҷамани рока даҳанд об затусиф хатат
дуд чароғаш ҳама шаб тара санабал шаканд
چرخ محال است دهد داد دل بیدل ما
گردش آن چشم مگر جام تغافل شکند
чарх маҳол аст даҳад дод дил бидел мо
гардаш он чашм магар ҷом тағофал шаканд
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- آینه
- سطح بازتابنده؛ در شعر نماد خودشناسی، صفا و جلوه است.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- صبح
- آغاز روشنایی پس از شب؛ نشانه امید، گشودگی یا بیداری.
- پای
- عضوِ ایستادن و رفتن؛ نمادِ ثبات و گام در راه.
- چمن
- سبزهزارِ خرّم؛ نمادِ بهار، باغ و جلوهگاهِ حسن.
- عرق
- تراوشِ پوست؛ نمادِ شرم، خجلت و لطافتِ رخسار.
- شرم
- حیا و آزرم؛ پروای درونی در برابرِ معشوق و حق.
- نظر
- نگاه و دیدن؛ توجهِ معشوق یا بصیرتِ باطن.
- آبله
- تاولِ پا یا دانهٔ پوست؛ نشانهٔ رنجِ راه و سلوک.